can see why he is laughing while dreaming

पूज्य गुरु जी के पवित्र वचनों पर आधारित शिक्षादायक सत्य प्रमाण

पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज इन्सान का उद्देश्य अपना रुतबा, इज्जत-शोहरत बढ़ाना, अपने लिए पैसा इकट्ठा करना और मायक पदार्थाें के लिए दिन-रात एक कर देना बना हुआ है। इसी के पीछे लोग दौड़ रहे हैं, भाग रहे हैं और इसी साजो-सामान के सपने देखते हैं। कोई जागते-जागते सपना देखते हैं कि मैं अरबोंपति बन गया, मैं करोड़पति बन गया, मैं ये कर दूंगा, मैं वो कर दूंगा।

इतनी दौलत होगी मेरे पास, लेकिन खुद चारपाई व रजाइयां तोड़ते रहते हैं। करना-करवाना कुछ भी नहीं। सपने इतने बड़े कि हिमालय भी शायद छोटा पड़ जाए। इसी प्रसंग के अनुरूप पूज्य गुरु जी ने एक दिलचस्प घटना का वर्णन किया जो आज के युग में लोगों की मनोदशा को देखते हुए बिल्कुल स्टीक बैठती है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि शेख चिल्ली की बात इस बारे में मशहूर है, वह भी जागते हुए सपने देखता था। वैसे सो कर तो सारे ही सपने देखते हैं और जागकर देखने वालों की भी कमी नहीं है। पुराने समय की बात है।

एक बार वह(शेख चिल्ली) कहीं खड़ा हुआ था। उसके पास कोई साहूकार आया। उस साहूकार के पास तेल का मटका था। वह साहूकार शेख चिल्ली को देख कर कहने लगा, भाई ऐसा है अगर तू मेरे घर तक यह तेल वाला मटका पहुंचा दे तो मैं तुझे चार आने-आठ आने दूंगा। चार आने-आठ आने की उस समय में बहुत कीमत हुआ करती थी। शेख चिल्ली ने सोचा कि यह तो बढ़िया काम मिल गया।

सिर पर वह मटका रख लिया और चलने लगा तथा साथ में सपने लेने शुरू कर दिए कि इस चवन्नी या अठन्नी से बहुत अण्डे आ जाएंगे। उनसे चूजे निकलेंगे। मुर्गे-मुर्गियां हो जाएंगी। वो भी हो गई। कौन-सा कहीं खरीदने जाना था। सपने में ही पैदा करनी थी। बहुत मुर्गियां हो गई। उनके अण्डे बेचने शुरू कर दिए, मुर्गे-मुर्गियां बेचनी शुरु कर दी। अच्छा पैसा आ गया। कहने लगा यह तो छोटा बिजनैस है, बड़ा व्यापार करते हैं। कहता, गऊएं लेकर आते हैं।

अब कहीं से गऊएं खरीदनी तो थी नहीं, विचारों में बदलना था। मुर्गे-मुर्गियां बेच दी और गऊएं आ गई। दूध बेचने लगा, बछड़े बिकने लगे। बहुत पैसा हो गया। अच्छा घर बना लिया। कहने लगा, भाई अब तो सब कुछ है, शादी करवा ली जाए, घर बसा लिया जाए। शादी भी हो गई। सिर पर मटका है और पैदल चला जा रहा था।

ऐसे सपने भी बराबर चल रहे थे। शादी हो गई, बाल-बच्चे भी हो गए और बड़ा खुश हो रहा है। अचानक मन के अंदर से करवट बदली, कहने लगा, तेरे पास पैसा भी बहुत है, औलाद भी है लोगों के सामने तेरी अमीरी भी है, परन्तु तेरा किसी पर रौब नहीं है। कोई तेरी परवाह नहीं करता।

कहने लगा, ये कौन सी बात है। अभी अपने घर से ही शुरू करते हैं। कई सज्जन घर से ही करते हैं, बाहर तो डर रहता है कहीं कोई लड़ ना पड़े। घर में रौब मारना शुरू कर देते हैं, उसने सोचा पहले घरवाली से ही शुरू करते हैं। घरवाली खाना लेकर आई कि लो आप खाना खाओ। कहता, मैं नहीं खाता।

कहती खा लो। उसे गुस्सा आ गया और साथ में लात चला दी और सपने में ही खाने वाली वो थाली बिखर गई। हकीकत में चलते-चलते जैसे ही उसने लात चलाई वो सिर पर रखा मटका नीचे गिरा और टूट गया।
साहूकार कहने लगा, अरे! शेखचिल्ली यह तूने क्या कर दिया।

मेरा तुमने इतना नुकसान कर दिया है। मेरा मटका फोड़ दिया सारा तेल बिखर गया। शेखचिल्ली कहने लगा, साहूकार जी! साहूकार जी! रहने दो! रहने दो! अरे, आपका तो मटका फूटा है मेरा तो बना-बनाया सारा घर-बार लुट गया है।
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कई ऐसे ही शेख चिल्ली और शेखचिल्ली की तरह होते हैं, बातों की खाते हैं। उनसे बात करो तो इतना आपको प्रभावित कर देंगे कि दोबारा बात नहीं करेंगे। विचारों-बातों में सपने होते हैं और सपने हकीकत में नहीं बदलते, जब तक इन्सान खुद मेहनत, हिम्मत नहीं करता।

शब्द में आता है:-

‘घर काम अपना भूला माया में फंस गया है।
आता नजर जो सपना क्यों देख हँस रहा है,
क्यों देख हँस रहा है।
कुछ भी नहीं है तेरा अपना,
है जिसे बनाया।।’

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