मानसून में सेहत सम्बन्धी भ्रमों की क्या हैं सच्चाई

मानसून में होने वाली बीमारियों जैसे सर्दी, खांसी या बुखार की वजह ज्यादातर लोग बारिश में भीगने को मानते हैं। साथ ही इस मौसम में कई चीज़ों को डाइट से बाहर करने की भी सलाह दी जाती है। लेकिन हकीकत में कई बातें सिर्फ भ्रम होती हैं, तो कुछ बातों के पीछे तथ्य कुछ और होता है।
आइये जानते हैं मानसून में सेहत से जुडी कुछ ऐसी ही बातें, जिनसे अक्सर हमें दो चार होना पड़ता है।

भ्रान्तिः

बारिश में भीगने पर सर्दी ज़ुकाम और बुखार का खतरा बढ़ जाता है।
सचः ज्यादातर लोग इस आशंका की वजह से बारिश में भीगने से डरते हैं। दरअसल बारिश का पानी बीमारी का कारण नहीं होता है। शरीर और मौसम के तापमान में आए अंतर की वजह से सर्दी लगने की आशंका रहती है। मौसम के अचानक गर्म से ठंडा हो जाने पर सर्दी ज़ुकाम और बुखार हो जाता है।

भ्रान्तिः

भीगने पर सीधा पंखा या एसी की हवा के सम्पर्क में आने से बुखार हो जाता है.
सचः तापमान में बदलाव आने के साथ हमारी इम्युनिटी भी काम हो जाती है। पंखे या एसी की हवा नुकसानदायक नहीं होती जब तक कि एसी वाले कमरे में कोल्ड वायरस नहीं हो। यह वायरस ही एसी या पंखे की हवा से फैल जाता है और हमें बीमार कर देता है।

भ्रान्तिः

बारिश में भीगने पर बुखार से बचने के लिए ठंडे पानी से ज़रूर नहाना चाहिए।

सचः

ऐसा ज़रूरी नहीं है। बारिश में भीगने के बाद नहाना इसलिए ज़रूरी है ताकि शरीर पर जमा मिटटी धूल उतर जाए। ज़रूरी नहीं है कि गर्म पानी से ही नहाया जाय।

भ्रान्तिः

मानसून में दही नहीं खाना चाहिए।

सचः

दही में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन तंत्र को ठीक रखने, पोषक तत्वों के अवशोषण और इम्युनिटी बढ़ाने का काम करते हैं। इस मौसम में डायरिया व फ़ूड पॉजनिंग जैसी समस्या अधिक होती है। जिससे राहत के लिए दही का सेवन किया जा सकता है। इस मौसम में शरीर की प्रतिरोधी क्षमता मंद पड़ जाती है इसलिए हम बीमार पड़ने लगते हैं।

भ्रान्तिः

बरसात के मौसम में स्विमिंग नहीं करना चाहिए.

सचः

बारिश के दौरान स्विमिंग पूल के आसपास का गंदा पानी पूल में मिल जाता है। इस गंदे पानी में जब आप स्विमिंग करते हैं तो बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है क्योंकि स्विमिंग के दौरान पानी मुंह में भी अक्सर चला जाता है।

भ्रान्ति :

बारिश के मौसम में आइसक्रीम या ठंडी चीज़ों से परहेज रखना चाहिए.

सचः

ज्यादातर आइसक्रीम परिष्कृत होती है जिसमें बैक्टीरिया नहीं बढ़ते। बिना साफ़ सफाई वाली आइसक्रीम में कीटाणु होने की आशंका होती है। ऐसे किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग चेक करनी चाहिए।

भ्रान्तिः

इस मौसम में अदरक की चाय पीना लाभकारी होता है।

सचः

अदरक की तासीर गर्म होती है। इसका सेवन तापमान कम होने पर शरीर में गर्माहट लाता है। इसमें एंटीसेप्टिक और दर्द निवारक गुण भी होते हैं। जो सांस से जुड़ी समस्या जैसे सर्दी, खांसी, अस्थमा आदि में भी राहत पहुंचाता है। ध्यान रखें कि ज्यादा अदरक की चाय डिहाइड्रेशन करती है।

भ्रान्तिः

मानसून में पत्तेदार सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।

सचः

आमतौर पर माना जाता है कि मानसून में पालक, मेथी, पत्तागोभी या अन्य तरह के साग का सेवन नहीं करना चाहिए। इसमें कीटाणु होते हैं जो बीमारियां फैलाते हैं। दरअसल उमस की वजह से उनमें कीटाणु पनपते हैं। लेकिन उन्हें अच्छी तरह से धो कर सक्रमण रहित किया जा सकता है। इन्हें पोटैशियम परमैग्नेट से साफ़ किया जा सकता है। हालांकि इस मौसम में कच्चा सलाद खाने से बचना चाहिए चूंकि उसमें कीटाणु पनपते हैं।

भ्रान्तिः

बारिश के मौसम में जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ने लगती है.

सचः

ह्यूमिडिटी बढ़ने के साथ ही बारिश के मौसम में एटमोस्फियरिक प्रेशर में भी बदलाव होता है। इससे जोड़ों में उपलब्ध तरल पदार्थ की मात्रा में बदलाव होने लगता है। गठिया के रोगियों में यह बदलाव ज्यादा होता है। इस मौसम में प्रोटीन युक्त डाइट जैसे सोयाबीन, टोफू, अंडा आदि लेना चाहिए। जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना सुबह-शाम खाली पेट तुलसी और दालचीनी मिलकर गुनगुना पानी पीना चाहिए।

भ्रान्तिः

इस मौसम में चाटपकौड़ी और बाहर की चीज़ें बीमारी को न्योता देती हैं।

सचः

यह चीज़ें नहीं बल्कि उसमें उपयोग होने वाला दूषित पानी बीमारियों का मुख्य कारण है। बदलते मौसम के साथ ही शरीर में भी बदलाव आने लगते हैं। अगर बदलते मौसम के अनुसार हमारा खान-पान और रहन- सहन भी बदल जाए तो हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं। मानसून से जुड़े कई मिथ हमारे रहन-सहन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में उनसे जुड़ी सच्चाईओं को जान लेना ज़रूरी होता है।

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