how to get respected in society- Sachi Shiksha

इस दुनिया में हर कोई चाहता है कि लोग उसे प्यार करें, उसकी प्रशंसा करें, उसे महत्त्व दें और सम्मान करें। पर जिंदगी में कई बार ऐसे लगने लगता है कि हमारा तिरस्कार हो रहा है। जो सम्मान लोगों से मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा और कुछ लोग जानबूझकर हमारी उपेक्षा कर रहे हैं।

ऐसे वक्त में लोगों से नाराज होने, चिढ़ने, उन्हें उलाहना देने से स्थिति सुधारने की बजाय बिगड़ जाती है और न सिर्फ उन लोगों से, जिनसे हमें शिकायत है, बल्कि दूसरे लोगों से भी रिश्तों में खटास आने लगती है। ऐसे में कई बार हमारी छवि एक झगड़ालू और अहंकारी व्यक्ति की भी बन सकती है जिससे लोगों से दूरी घटने की बजाय बढ़ने लगती है।

बेहतर होगा कि कुछ चीजों को नजरअंदाज किया जाए और उन पर कोई प्रतिक्रिया न दी जाए। इससे फायदा यह होगा कि आपके तिरस्कार की बात कुछ लोगों को छोड़कर बाकी लोगों तक नहीं पहुंच पाएगी। गौतम बुद्ध ने कहा है कि सुकून और शांति चाहिए तो हमें दूसरों को बदलने या नियंत्रित करने की जगह खुद की भावनाओं पर नियंत्रण और नजरिए में बदलाव लाना चाहिए। जिसने अपने मन पर नियंत्रण पा लिया, वह व्यक्ति उस व्यक्ति से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है और बड़ा विजेता है, जिसने हजार बार युद्ध के मैदान में हजार लोगों को हरा दिया है लेकिन यह प्रक्रि या इतनी आसान नहीं है। कई बार आप की बहुत सारी कोशिशों और धैर्य के बावजूद परिस्थितियां असहनीय हो जाती हैं। फिर भी आपको अपने पथ और संकल्प पर दृृढ़ रहना है, क्योंकि अंत में विजय आपको ही मिलेगी ।

आपके मृदु व्यवहार और शांत स्वभाव के कारण द्वैषी और कटु-भाषी मित्र या रिश्तेदारों को कभी न कभी आत्मग्लानि महसूस होगी और न भी हो तो भी आप उनके दुर्व्यवहार और आचरण से प्रभावित होना छोड़ चुके हैं इसलिए आप पर इन बातों का कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। अलबत्ता आप दोनों को जानने वाले जरूर आपकी सज्जनता के कायल हो जाएंगे और समाज की दृष्टि में आपका सम्मान बढ़ेगा।

इन सबसे इतर क्या एक बात पर आपने कभी गौर किया है कि आखिर दूसरों की प्रशंसा, सम्मान और महत्व दिया जाना आपके मन के सुकून के लिए इतना जरूरी क्यों है? क्योंकि आप दूसरों के अनुमोदन और मूल्यांकन को जरूरत से ज्यादा महत्त्व देते हैं। अगर आप ऐसा करना छोड़ दें और इनके प्रति तटस्थ भाव अपना लें, तो ऐसा कभी नहीं होगा । दूसरों से तुलना करने और उनसे उम्मीदें करने से अच्छा है आप अपनी विशेषताओं और अनूठेपन को पहचानें और उन्हें निखारने, उभारने का प्रयास करें।

आपको जानना और मानना चाहिए कि हम सब ईश्वर की अनूठी कृति हैं और उसका यूनिक सृजन है, इसलिए तो हमें दूसरों की तुलना में अच्छा और बुरा होने की भावना मन में नहीं रखनी चाहिए। हमारा प्रयास जिंदगी को बहुमूल्य और उपयोगी बनाने का होना चाहिए। इस प्रयास में जिंदगी की जिन चीजों से या जिन लोगों से हमें परेशानी हो या अवरोध महसूस हो, उनका त्याग करके आगे की यात्रा करनी चाहिए। बेहतर होगा कि हम समान विचार वालों और समान लक्ष्य वाले लोगों का साथ पकडंÞे जिससे हमारी यात्रा आसान हो और हम सब एक-दूसरे का सहयोग करते हुए आगे बढ़ सकें।

इतना ही नहीं, बुरी चीजों, बुरे लोगों और बुरी यादों पर फोकस करने के बजाय हमें अच्छी चीजों, अच्छे लोगों और अच्छी यादों पर फोकस करना चाहिए, जिससे मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। दूसरों की अनुशंसा, सम्मान और प्रशंसा की बजाए हमें आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और ईश-वंदना पर जोर देना चाहिए, साथ ही प्रकृति, अपने माता-पिता ,भाई-बहन और मित्रों को प्रेम करना सीखना चाहिए। याद रहे, ये चीजें ही आपके लिए महत्त्व रखती हैं और आड़े वक्त में यही सही मायने में काम आने वाली हैं।

श्री गुरु नानक देव जी ने भी कहा था, ‘हमारे लिए जो कुछ करता है, ईश्वर करता है, हमें उसके सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिए और उसकी इच्छा का सदैव स्वागत करना चाहिए।’ हम सब यहां ईश्वरीय-कार्य करने और उसकी मर्जी का पालन करने के लिए ही हैं, जिस दिन से आप अपने मन में इन बातों को स्थान दे देंगे उस दिन आप कई दुश्चिंताओं से खुद-ब-खुद छुटकारा पा लेंगे।

– शिखर चंद जैन

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