किसान खेमाराम चौधरी के प्रयास से गांव कुमानवतान बना मिनी इजरायल

खेमाराम अपनी खेती से सलाना एक करोड़ का टर्नओवर ले रहे हैं। जयपुर के इस मिनी इजरायल की चर्चा पूरे राज्य के साथ कई अन्य प्रदेशों और विदेश के भी कई हिस्सों में है। एक पॉली हाउस लगाने में 33 लाख का खर्चा आया, जिसमें नौ लाख मुझे देना पड़ा, जो मैंने बैंक से लोन लिया था। बाकी सब्सिडी मिल गई थी। पहली बार खीरा बोए, करीब डेढ़ लाख रुपए इसमें खर्च हुए। चार महीने में ही 12 लाख रुपए का खीरा बेचा।

ये खेती को लेकर मेरा पहला अनुभव था। खेती किसानी के मामले में इजरायल को दुनिया का सबसे हाईटेक देश माना जाता है। वहां रेगिस्तान में ओस से सिंचाई होती है, दीवारों पर गेहूं, धान उगाए जाते हैं। भारत के लाखों लोगों के लिए ये एक सपना ही है। इजरायल की तर्ज पर जयपुर के एक किसान ने खेती शुरू की और आज उनका सालाना टर्नओवर को सुनकर आप भी दांतों तले ऊंगली दबा लेंगे। जयपुर जिले में एक गांव है गुड़ा कुमावतान, ये किसान खेमाराम चौधरी का गांव है।

खेमाराम ने तकनीक और अपने ज्ञान का ऐसा तालमेल बिठाया कि वो लाखों किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं। आज उनका मुनाफा लाखों  रुपए में है। चौधरी ने इजरायल के तर्ज पर 6-7 साल पहले (सन 2012) पॉली हाउस बनाने की शुरूआत की थी। आज इनके देखादेखी आसपास लगभग 200 पॉली हाउस बने हैं। आज लोग इस क्षेत्र को मिनी इजरायल के नाम से जानते हैं। खेमाराम अपनी खेती से सलाना एक करोड़ का टर्नओवर ले रहे हैं। जयपुर के इस मिनी इजरायल की चर्चा पूरे राज्य के साथ कई अन्य प्रदेशों और विदेश के भी कई हिस्सों में है। खेती के इस बेहतरीन मॉडल को देखने किसानों का गांव में आना-जाना लग रहता है।

इजरायल जाने का मिला मौका

जयपुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर गुड़ा कुमावतान गांव है, जो जयपुर से कालवाड़ रोड के पास स्थित है। इस गांव के किसान खेमाराम चौधरी को सरकार की तरफ से इजरायल जाने का मौका मिला। इजरायल से वापिसी के बाद इनके पास कोई जमा पूंजी नहीं थी, लेकिन वहां की कृषि की तकनीक को देखकर इन्होंने ठान लिया कि उन तकनीकों को अपने खेत में भी लागू करेंगे।

सरकार की सब्सिडी से बनाया पॉली हाउस

चार हजार वर्गमीटर में इन्होंने पहला पॉली हाउस सरकार की सब्सिडी से लगाया। खेमाराम ने बताया कि एक पॉली हाउस लगाने में 33 लाख का खर्चा आया, जिसमें नौ लाख मुझे देना पड़ा, जो मैंने बैंक से लोन लिया था। बाकी सब्सिडी मिल गई थी। पहली बार खीरा बोए, करीब डेढ़ लाख रुपए इसमें खर्च हुए। चार महीने में ही 12 लाख रुपए का खीरा बेचा। ये खेती को लेकर मेरा पहला अनुभव था। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी मैं बैंक का कर्ज चुका पाऊंगा ऐसा मैंने सोचा नहीं था पर जैसे ही चार महीने में ही अच्छा मुनाफा मिला। मैंने तुरंत बैंक का कर्जा अदा कर दिया। चार हजार वर्ग मीटर से शुरूआत की थी आज तीस हजार वर्ग मीटर में 7 पॉली हाउस लगाए हैं।

क्षेत्र को बनाया मिनी इजरायल

खेमाराम चौधरी राजस्थान के पहले किसान थे, जिन्होंने इजरायल के इस मॉडल की शुरूआत की थी। आज इनके पास खुद के सात पॉली हाउस हैं, दो तालाब हैं, चार हजार वर्ग मीटर में फैन पैड है, 40 किलोवाट का सोलर पैनल है। इनके देखा देखी आज आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में करीब 200 पॉली हाउस बन गए हैं। इस जिले के किसान संरक्षित खेती करके अब अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

पहले ड्रिप इरिगेशन लगाया

खेमाराम ने अपनी खेती में 2006-07 से ड्रिप इरीगेशन 18 बीघा खेती में लगा लिया था। इससे फसल को जरूरत के हिसाब से पानी मिलता है और लागत कम आती है। ड्रिप इरीगेशन से खेती करने की वजह से जयपुर जिले से इन्हें ही सरकारी खर्चे पर इजरायल जाने का मौका मिला था, जहां से ये खेती की नई तकनीक सीख कर आए हैं। ड्रिप से सिंचाई में बहुत पैसा बच जाता है और मल्च पद्धति से फसल मौसम की मार, खरपतवार से बच जाती है, जिससे अच्छी पैदावार होती है। तरबूज, ककड़ी, टिंडे और फूलों की खेती में अच्छा मुनाफा है। सरकार इसमें अच्छी सब्सिडी देती है। एक बार लागत लगाने के बाद इससे अच्छी उपज ली जा सकती है।

खेत में राज्य का पहला फैन पैड

फैन पैड (वातानुकूलित) का मतलब पूरे साल जब चाहें जो फसल ले सकते हैं। इसकी लागत बहुत ज्यादा है, इसलिए इसकी लगाने की हिम्मत एक आम किसान की नहीं हैं। 80 लाख की लागत में 10 हजार वर्गमीटर में फैन पैड लगाने वाले खेमाराम ने कहा कि पूरे साल इसकी आक्सीजन में जिस तापमान पर जो फसल लेना चाहें ले सकते हैं। मैं खरबूजा और खीरा ही लेता हूं। इसमे लागत ज्यादा आती है, लेकिन मुनाफा भी चार गुना होता है। डेढ़ महीने बाद इस खेत से खीरा निकलने लगेगा, जब खरबूजा कहीं नहीं उगता उस समय फैन पैड में इसकी अच्छी उपज और अच्छा भाव ले लेते हैं। वो आगे बताते हैं, खीरा और खरबूजा का बहुत अच्छा मुनाफा मिलता है, इसमें एक तरफ 23 पंखे लगें हैं दूसरी तरफ फब्बारे से पानी चलता रहता है। गर्मी में जब तापमान ज्यादा रहता है तो सोलर से ये पंखा चलते हैं। फसल की जरूरत के हिसाब से वातावरण मिलता है, जिससे पैदावार अच्छी होती है।

तालाब के पानी से सिंचाई

खेमाराम ने अपनी आधी हेक्टेयर जमीन में दो तालाब बनाए हैं, जिसमें बरसात का पानी एकत्रित हो जाता है। इस पानी से छह महीने तक सिंचाई की जा सकती है। ड्रिप इरीगेशन और तालाब के पानी से ही पूरी सिंचाई होती है। ये सिर्फ खेमाराम ही नहीं, बल्कि यहां के ज्यादातर किसान पानी ऐसे ही संरक्षित करते हैं। पॉली हाउस की छत पर लगे माइक्रो स्प्रिंकलर भीतर तापमान कम रखते हैं। दस फीट पर लगे फव्वारे फसल में नमी बनाए रखते हैं।

सूरज की ऊर्जा से बिजली कटौती को दे रहे मात

हर समय बिजली नहीं रहती है, इसलिए खेमाराम ने अपने खेत में सरकारी सब्सिडी की मदद से 15 वाट का सोलर पैनल लगवाया और खुद से 25 वाट का लगवाया। इनके पास 40 वाट का सोलर पैनल लगा है। ये अपना अनुभव बताते हैं, “अगर एक किसान को अपनी आमदनी बढ़ानी है तो थोड़ा जागरूक होना पड़ेगा। खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी रखनी पड़ेगी, थोड़ा रिस्क लेना पड़ेगा, तभी किसान अपनी कई गुना आमदनी बढ़ा सकता है।” वो आगे बताते हैं, सोलर पैनल लगाने से फसल को समय से पानी मिल पाता है, फैन पैड भी इसी की मदद से चलता है, इसे लगाने में पैसा तो एक बार खर्च हुआ ही है लेकिन पैदावार भी कई गुना बढ़ी है जिससे अच्छा मुनाफा मिल रहा है, सोलर पैनल से हम बिजली कटौती को मात दे रहे हैं।

मिला राष्ट्रीय अवार्ड

खरबूजा की बेहतर पैदावार के लिए इन्हें साल 2015 में महिंद्रा की तरफ से नेशनल अवार्ड केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह द्वारा दिल्ली में दिया गया। इन्हें कृषि विभाग की तरफ से सोलर पैनल लगाने के लिए सम्मानित किया जा चुका है। खेमाराम चौधरी का कहना है कि आज इस बात की मुझे बेहद खुशी है कि हमारे देखादेखी ही सही पर किसानों ने खेती के ढंग में बदलाव लाना शुरू किया है। इजरायल मॉडल की शुरूआत राजस्थान में हमने की थी, आज ये संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है। किसान लगातार इसी ढंग से खेती करने की कोशिश में लगे हैं।

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