Navjaat Shishu Ki Dekhbhal Kaise Karen - Sachi Shiksha

नवशिशुओं को पालना अपने आप में एक बड़ा काम है। शादी के बाद महिलाओं की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं, विशेषकर जब वे मां बनती हैं। इतने छोटे-छोटे काम दिनभर में बढ़ जाते हैं कि मां के पास आराम करने के लिए समय ही नहीं निकल पाता। मां को चाहिए कि काम के साथ-साथ शिशुओं की सफाई पर भी उचित ध्यान दें और अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास करें।

Navjaat Shishu Ki Dekhbhal Kaise Karen

क्या करें

  • हर मां को चाहिए कि वह शिशु को अपना दूध दे। बाहरी दूध मजबूरीवश ही दें। बच्चे को अपना दूध कम से कम 4 माह तक अवश्य दें।
  • अपना दूध देने से पहले मां को हर बार अपने स्तन गीली रूई या नर्म कपड़े से साफ कर लेने चाहिए।
  • बच्चे को तेज धूप व तेज हवा से बचा कर रखें।
  • शीत ऋतु में बच्चे को कुछ समय धूप में लिटाएं। ध्यान रखें कि बच्चे का मुख सूरज की तरफ न हो।
  • छोटे शिशुओं को सूती वस्त्र ही पहनायें। वस्त्र अधिक कसे हुए न पहनायें क्योंकि छोटे शिशुओं के वस्त्र मां को ही पहनाने और उतारने पड़ते हैं।
  • शिशुओं की हल्के हाथों से  मालिश करें और हल्के-फुल्के व्यायाम करवायें। मालिश करने से खून का दौरा बढ़ता है।
  • मालिश के उपरान्त बच्चे को प्रतिदिन नहलाएं। शीत ऋतु में आप एक दिन छोड़कर भी नहला सकते हैं परंतु बच्चे को स्पंज अवश्य करके ही वस्त्र बदलें।
  • शिशु के लिए अलग तौलिया प्रयोग में लाएं। ध्यान रखें कि तौलिया बहुत नरम होना चाहिए।
  • बच्चों के तेल, साबुन, पाउडर आदि अच्छी क्वालिटी के ही प्रयोग में लाएं।
  • शिशु का हेयर ब्रश और कंघी भी अलग रखें और बीच-बीच में उन्हें साफ करती रहें।
  • शिशु को दूध एक निश्चित अंतराल में पिलाएं पर यदि बच्चे को बीच में भूख लगे तो उसे दूध अवश्य दें, रूलायें नहीं।
  • जब बच्चे को बोतल से दूध देना प्रारंभ करें तो हर फीड देने से पहले बोतल और निपल को धोकर उबाल कर उसमें दूध दें।
  • बच्चे को खाली समय में गोद में लेकर प्यार करें और बातें करें। इससे बच्चे को स्पर्श का आभास होता है। स्पर्श बच्चे के लिए प्यार का सबसे बड़ा प्रतीक होता है। बच्चा अपने आपको मां की गोद में सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करता है।
  • शिशु को खांसी-जुÞकाम, उल्टी-दस्त और बुखार होने पर नजरअंदाज न करें। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
  • बच्चे की जीभ को नर्म साफ कपड़े से साफ करें।
  • बच्चे के नाखून समय-समय पर काटते रहें।
  • बच्चे को कुछ समय खुले बिस्तर पर खेलने दें।

क्या न करें

  • बच्चों को खुशबूदार चीजों से दूर रखें क्योंकि अधिक खुशबू से बच्चों को एलर्जी हो सकती है।
  • बच्चों का मन न होने पर बच्चों को जबरदस्ती कुछ खाने को न दें।
  • बच्चों को रेशमी वस्त्र न पहनायें क्योंकि रेशमी वस्त्रों से बच्चे को त्वचा रोग हो सकता है।
  • बच्चों के होंठों पर कभी प्यार न करें। उनके माथे पर चुंबन लें।
  • छोटे बच्चों के हाथों में कभी नुकीले खिलौने न दें।
  • छोटे बच्चों को कभी जोर से न भीचें, न ही उनके गाल बार-बार खीचें।
  • शिशु की आंखों में काजल सुरमा न लगाएं।
  • अपनी मर्जी से बच्चे को कोई दवा न दें। डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही दवा दें। अपनी इच्छा से दवा बंद न करें।
  • दवा देने से पहले एक्सपायरी तारीख देख लें। पुरानी होने पर दवा फेंक दें।
  • बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक होती है। उन्हें तेज धूप और आंधी में न लिटाएं।
  • बच्चे को गोदी की अधिक आदत न डालें पर बीमार अवस्था में उसकी उचित देखभाल करें। ऐसे में बच्चे को मां के प्यार दुलार की अधिक आवश्यकता होती है।
  • बच्चे को अधिक उछालें नहीं।
  • बच्चे को अकेला मत छोड़ें।
    सुनीता गाबा

सच्ची शिक्षा हिंदी मैगज़ीन से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें FacebookTwitter, और InstagramYouTube  पर फॉलो करें।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here