Rafael of Air Force who brought home from France

वायुसेना दिवस (8 अक्टूबर)
8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना की गई थी, इसीलिए हर साल 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस मनाया जाता है। इस दिन वायुसेना भव्य परेड और एयर शो आयोजित करती है। आजादी से पहले वायुसेना को रॉयल इंडियन एयर फोर्स कहा जाता था। एक अप्रैल 1933 को वायुसेना के पहले दस्ते का गठन हुआ था, जिसमें 6 आरएएफ-ट्रेंड आॅफिसर और 19 हवाई सिपाहियों को शामिल किया गया था। भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजादी के बाद इसमें से रॉयल शब्द हटाकर केवल इंडियन एयरफोर्स कर दिया गया।

पांच राफेल ने फ्रांस के मेरीग्नेक से भारत के लिए भरी थी उड़ान। पायलटों के इस दल का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह ने किया। अंबाला में भारतीय वायुसेना का एयरबेस उन सुनहरे पलों का गवाह बना जब पांच राफेल लड़ाकू विमानों ने भारतीय जमीन को छुआ। वायुसेना के 7 जांबाज पायलट इन विमानों को फ्रांस से 7,000 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यहां लाए। इन पायलटों का भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने स्वागत किया। इन पांच राफेल ने दक्षिणी फ्रांस के मेरीग्नेक से भारत के लिए उड़ान भरी और बीच में एक स्टॉपओवर लेने के बाद यहां पहुंचे।

ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह

पायलटों के दल का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह ने किया। वे 17 स्क्वॉड्रन के कमांडिंग आॅफिसर हैं जिसे गोल्डन एरोज के नाम से भी जाना जाता है। ये स्क्वॉड्रन अंबाला एयरबेस पर तैनात हैं और पश्चिमी कमांड का हिस्सा है। ग्रुप कैप्टन सिंह को 2008 में शौर्य चक्र से नवाजा गया। वे मिग 21 बाइसन की उड़ान पर थे जब उन्हें आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने न सिर्फ अपने एयरक्राफ्ट को बचाया बल्कि ये सुनिश्चित किया कि किसी जान का नुकसान न हो। 2001 में वायुसेना में कमीशन लेने वाले ग्रुप कैप्टन सिंह नई राफेल स्क्वाड्रन के पहले कमांडिंग आॅफिसर हैं। ग्रुप कैप्टन सिंह के पिता भी सेना में रहे और लेफ्टिनेंट कर्नल की पोस्ट पर रिटायर हुए. उनकी पत्नी भी वायुसेना में सर्विंग आॅफिसर हैं।

विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी

विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी राजस्थान के छोटे शहर जालौर से हैं। विंग कंमाडर त्रिपाठी को लेकर उनके गांव के लोगों का सीना गर्व से चौड़ा है। उनके दोस्त बताते हैं कि वे बचपन में दौड़ने और कुश्ती में भी दांव आजमाने के शौकीन रहे हैं। 9 जनवरी 1984 को जन्मे विंग कमांडर त्रिपाठी के पिता बैंक में कार्यरत रहे और उनकी मां ने सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में काम किया। जालौर के लोगों का कहना है कि विंग कमांडर त्रिपाठी के माता-पिता आदर्श संरक्षक होने की मिसाल हैं।

विंग कमांडर त्रिपाठी को बचपन में स्पोर्ट्स और कुश्ती से परिचय कराने वाले दलपत शिवदत्त आर्य कहते हैं, उनकी परवरिश उनकी सफलता और विनम्रता की वजह है। वह अभी भी अपनी जड़ों से जुड़े हैं और ऐसे लोगों के करीब हैं, जिन्होंने बचपन में उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी को उन पर गर्व है।

विंग कमांडर मनीष सिंह

विंग कमांडर मनीष सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के छोटे से गांव बकवा से ताल्लुक रखते हैं। उनके कई रिश्तेदारों ने सेना में सेवाएं दीं। इसी परम्परा को जारी रखते हुए उन्होंने सैनिक स्कूल में दाखिला लिया और फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी पहुंचे। उन्हें भारतीय वायुसेना में 2003 में कमीशन मिला। उन्हें राफेल की ट्रेनिंग के लिए फ्रांस भेजे जाने और उनके फ्रांस से विमान को स्वदेश लाने को लेकर पूरे गांव में उत्साह का माहौल है। विंग कमांडर मनीष सिंह की मां का कहना है कि हर कोई उनके बेटे को लेकर गर्व कर रहा है।

विंग कमांडर मनीष सिंह के पिता मदन सिंह कहते हैं कि एक बच्चे के रूप में वह एक विमान को उड़ता हुआ देखता था और कहता था कि एक दिन वह ऐसा ही करेगा। हमें खुशी है कि उसने अपने सपने को जिन्दा किया है। विंग कमांडर मनीष सिंह की मां उर्मिला देवी कहती हैं कि सीमाओं पर तनाव की बात सुनना कभी-कभी डरावना होता है, लेकिन पूरे देश की प्रार्थनाएं न सिर्फ उनके बेटे को बल्कि भारत की सेनाओं में सभी बहादुरों को महफूज रखेंगी। जब से वह प्रशिक्षण के लिए फ्रांस भेजा गया था, हम प्रार्थना कर रहे थे कि उसे राफेल को भारत लाने के लिए चुना जाए।

ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया

ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया भी उन पायलट्स के बैच में शामिल हैं जो राफेल को फ्रांस से भारत लेकर आए। वे हरियाणा के गुरुग्राम के बसई गांव से नाता रखते हैं। उनके पिता भी सेना में अधिकारी रहे हैं। कर्नल के पद से रिटायर होने के बाद ग्रुप कैप्टन कटारिया के पिता सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल रहे। ग्रुप कैप्टन कटारिया की उपलब्धियों को सुनकर उनके गांव में युवकों में जोश देखते ही बनता है। ये युवक पायलट को अपना रोल मॉडल बताते हैं। ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया के दादा पोते की उपलब्धि को लेकर गौरवान्वित हैं।

वे कहते हैं, वह हमेशा बच्चे के रूप में करतब करने के शौकीन थे। और अब वह असल में हवा में कुछ करतब कर रहा है। राफेल के आगमन ने भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमताओं में नये युग की शुरूआत की। साथ ही वायुसेना से जुड़ने के लिए युवाशक्ति को प्रेरित भी करेंगे। ये हीरो दूसरे पायलटों को भी ट्रेनिंग देने में अहम भूमिका निभाएंगे और ये गौरवगाथा इसी तरह आगे बढ़ती जाएगी। राफेल की कीर्ति से जुड़े ये कुछ चेहरे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे भी कई और हैं जो भारत की वायुसेना की इस नई ताकत को जल्दी से जल्दी एक्शन में लाने में दिन-रात जुटे हैं।

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