how to take care of sarees Sachi Shiksha Hindi

भारतीय नारी का परिधान साड़ी, न केवल भारतीय नारी के व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाता है अपितु उसके शारीरिक सौन्दर्य को पूर्ण रूपेण उभारता है। यह तो तय है कि इनकी उचित देखभाल की जाए तो ये सालों साल अपनी सुन्दरता बनाए रखती हैं।

यहां कुछ सुझाव आपके लिए प्रस्तुत हैं जिनको ध्यान में रख कर आप अपनी साड़ियों की चमक बनाए रख सकती हैं।

  • चाहे साड़ी कॉटन की हो या फिर जरी वाली हो, शिफॉन की हो या कढ़ाईवाली हो, हर साड़ी को आप फॉल लगा कर ही पहनें। जब कभी भी आप फॉल खरीदने के लिए जाएं तो इसका चयन ध्यानपूर्वक करें। आपने देखा होगा कि कच्चे रंग वाली फॉल साड़ी को नष्ट कर देती है।
  • आप जब भी साड़ी पहनें तो इतनी नीची न पहनें कि जमीन पर घिसटने लगे। बार बार नीचे रगड़ने से साड़ी फटने का भय रहता है।
  • साड़ी कहीं से फट गई हो तो उसे रफू करने के पश्चात ही साड़ी धोएं, प्रेस करवाएं और पहनें।।
  • साड़ी पर कुछ तेल आदि जैसे द्रव पदार्थ गिर जाएं तो आप ब्लाटिंग पेपर की सहायता से उसे सोक लें तथा उसमें टेलकम पाउडर छिड़क दें।
  • बाहर से आने के पश्चात आप अपनी साड़ी को अवश्य कुछ देर तक टांग कर हवा लगने दें। फिर चाहे आप इसे तह लगा सकती हैं।
  • सूती साड़ियों में कलफ लगा कर पहनें। इससे आपके व्यक्तित्व में अलग निखार आएगा। कलफ लगी साड़ियों को अधिक दिन तक रखने की भूल न करें। इसमें झींगुर लगने की संभावना रहती है।
  • कुछ दाग धब्बे लग जाने से आप दुनिया भर की चीजें उस पर प्रयोग न करें। उसे जल्दी से ड्राईक्लीन के लिए दें। पुराने दाग हो जाने पर इन्हें छुड़वाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  • जरीवाली साड़ियों को आप पालीथिन में कभी न रखें। इससे जरी काली पड़ने का खतरा रहता है। बेहतर होगा कि आप उसे पुरानी सूती की साड़ी में लपेट कर रखें, ऐसा करने से जरी की चमक बरकरार रहेगी।
  • नीम की पोटली बना कर आप अपने बक्से में रखें, इससे कीड़े नहीं लगेंगे, साथ ही सीलन की गंध भी नहीं रहेगी। अपनी जरी वाली साड़ियों पर इत्र न लगाएं, इससे निशान तो पड़ते ही हैं, साथ ही जरी काली भी पड़ जाती है।
  • रेशमी साड़ियों को नमक के पानी में भिगोकर हल्के साबुन से भी आप धो सकती हैं।
  • रंगीन साड़ियों को धूप में न सुखाएं। रंगीन कपड़ों में जब कलफ देती हैं तो सूखने के तुरन्त पश्चात ही धूप से ले आएं। रंग फीके होने की संभावना रहती है।
  • हल्की साड़ियों को ठंडी इस्तरी या हल्की गरम इस्तरी करें।
  • बारिश के समय शिफॉन और सिंथेटिक की साड़ी का ही प्रयोग करें, यह जल्दी सूख जाती है। कलफ लगी साड़ी, जरी वाली साड़ियों का प्रयोग न ही करें तो अच्छा है।
  • रेशमी साड़ियों को धोते समय कुछ बूंद ग्लिसरीन की डालें, इससे सिलवटें नहीं पड़ती। जहां तक संभव हो, रेशमी साड़ियों को बार-बार न धोएं।
  • बरसात आने से पूर्व ही साड़ियों को धूप दिखा कर नीम की पत्तियों समेत बक्से में रखें।
    -रूबी

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