Guru Maa

गुरु-मां दिवस 9 अगस्त

पूजनीय माता नसीब कौर जी इन्सां के 86वें जन्म दिवस पर विशेष गुरु-मां कोटि-कोटि नमन है तुझे
गुरु मां तू महान है। यह वाकई ही सच है कि महापुरुषों ने तुझे भगवान का दर्जा दिया है। वैसे तो हर जननी को संत-महापुरुषों ने भगवान का ऊँचा दर्जा दिया है, परन्तु खास करके वो मां जिसकी पवित्र कोख से भगवान ने किसी संत, गुरु, पीर-फकीर के रूप में अवतार धारण किया और जिनके जाये(जन्मे) अपने शौर्य, नेक, भले कार्य करके संसार में माता-पिता का धन धन करा जाते हैं और मां भी पूजने योग्य बन जाती है। कितना ऊँचा रुतबा हो जाता है उस माता-पिता का जिनका जाया(जन्म लिया) महापुरुषों जैसा बेटा दुनिया के भलाई-कार्याें को सफलता की बुलंदियों तक ले जाता है।

ऐसे माता-पिता के लिए पवित्र वाक्य है

‘धनु जननी जिनि जाइआ
धंनु पिता परधानु।।’

महापुरुषों की वो जननी धन कही जाती है जिनके यहां जन्मे रूहानियत के ऐसे मसीहा कहलाते हैं जो सृष्टि को तारने तथा इन्सानियत व समाज के भले के लिए अपना जीवन मानवता के प्रति अर्पण कर देते हैं।

धन-धन है परमात्मा स्वरूप पूजनीय माता नसीब कौर जी इन्सां जिन्होंने अपनी पवित्र कोख से खुद भगवान स्वरूप पूजनीय गुरु संत डॉ. गरुमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को अपने बेटे के रूप में जन्म दिया है और इस तरह भगवान स्वरूप अपने बेटे की जननी होने का महान गुरु-मां का दर्जा व मान हासिल किया है।

पूजनीय गुरु जी के मानवता-हितैषी कार्याें की लहर को देख कर एक बार कुछ पत्रकार सज्जनों ने पूजनीय माता जी से पूछ लिया कि आप जी का बेटा(पूज्य गुरु जी) मानवता व समाज भलाई के इतने सारे कार्य कर रहा है, जैसे-देश के वातावरण की स्वच्छता के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण करना और इसके साथ ही समाज कल्याण के लिए शिक्षा के क्षेत्र को ऊँचा उठाना, किसानों की खुशहाली व किन्नर उद्धार के कार्य तथा इसी तरह वेश्यावृति व समलैंगिकता जैसी बुराई के विरुद्ध भी अपनी आवाज उठाई हुई थी तथा और भी अनेक समाज सुधार के कार्याें की मुहिम चलाई हुई थी, तो आप क्या महसूस करते हैं और इस बारे क्या कहना चाहेंगे, तो पूजनीय माता जी ने परम-आनन्द का अनुभव करते हुए(वो परमानन्द जिसे शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता) उत्तर दिया, ‘मेरा बेटा देश व धर्म की खातिर जन-कल्याणकारी काम कर रहा है।

मेरी कामना है कि खुदा रूपी मेरा बेटा जल्दी ही दुनिया को सुधारे और जो मुकाम हासिल करना है उसे पूरा करे। मैं अपने पुत्र की लम्बी आयु की कामना करती हूं।’ धन्य हैं पूजनीय माता नसीब कौर जी इन्सां और धन्य है पूजनीय बापू नम्बरदार सरदार मग्घर सिंह जी जिन्होंने अपने इकलौते लाडले सुपुत्र पूजनीय गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को 23 वर्ष की भरी जवानी की आयु में सृष्टि के कल्याणकारी कार्याें के लिए अपने सच्चे मुर्शिद पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के हुक्मानुसार उनको अर्पण कर दिया।

ऐसी महान गुरु-मां व महान पिता को उनके इस महान त्याग पर लख-लख सजदा, कोटि-कोटि नमन है। डेरा सच्चा सौदा में साध-संगत इस महान-गुरु-मां को समर्पित 9 अगस्त का दिन हर साल ‘गुरु मां डे’ के नाम से उनके जन्म दिवस को धूम-धाम से मनाती है।

पवित्र जीवन-दर्शन

अति पूजनीय माता नसीब कौर जी इन्सां का जन्म 9 अगस्त 1934 को आदरणीय माता जसमेल कौर जी की पवित्र कोख से पूज्य बापू सरदार गुरदित्त सिंह जी के घर पंजाब के जिला फाज़िल्का के गांव किक्कर खेड़ा तहसील अबोहर में हुआ। आप जी का शुभ विवाह श्री गुरुसर मोडिया तहसील सूरतगढ़ जिला श्री गंगानगर (राजस्थान) के बहुत ही सत्कार योग्य नम्बरदार सरदार मग्घर सिंह जी से हुआ। इतने ऊंचे घराने की पूजनीय माता जी की नेक नियति व रहमदिली की हर गांववासी मिसाल देता नहीं थकता।

पूजनीय बापू जी के गरीबों व जरूरतमंदों के प्रति हमदर्दी की भावना आदि अनेक कार्याें को पूज्य माता जी ने अपना भरपूर सहयोग देकर और आगे बढ़ाया। इस तरह पूज्य माता जी जहां जरूरतमंदों के प्रति हमदर्दी रखते हुए उनकी हर तरह मदद करते, वहीं अपने उच्च गुणों करके पूज्य बापू जी के घर को अन्दरूनी व बाहरी आकर्षण को भी चार चांद लगाए। घर का हर कार्य पूज्य माता जी स्वयं अपने हाथों से ही करते। चाहे पूज्य माता जी रसोई में होते या मक्खन-घी निकाल रहे होते, हर कार्य को इतने हुनर व सुंदर ढंग से करते कि हर कोई उनकी तारीफ किए बगैर न रहता।

संतान सुख:-

पूजनीय माता जी की पवित्र कोख तब सुलखणी हुई जब 18 सालों के बहुत लम्बे इंतज़ार के बाद एक-इकलौती संतान के रूप में पूजनीय गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 15 अगस्त 1967 को आप जी के घर अवतार धारण किया। पूज्य बापू नम्बरदार सरदार मग्घर सिंह जी के घर किसी भी चीज की कमी नहीं थी।

इतने बड़े खानदान जमीन-जायदाद के मालिक पूज्य बापू जी के घर दुनिया की हर सुख-सुविधा थी। परन्तु कमी थी खानदान के वारिस की। पूजनीय माता-पिता जी की भक्ति व संतों की सेवा को फल लगे, समय 18 वर्षाें का लंबा बेशक लगा, परन्तु जब समय आया स्वयं परम पिता परमात्मा का नूर आप जी के घर आप जी के बेटे(पूजनीय गुरु जी) के रूप में प्रकट हुआ। हालांकि गांव के आदरणीय संत त्रिवैणी दास जी ने पूज्य बापू जी को पूजनीय गुरु जी के जन्म से पहले और जन्म के बाद बता दिया था कि यह कोई आम बच्चा नहीं है।

ये तो स्वयं परम पिता परमेश्वर ने आपके घर आपके बेटे के रूप में जन्म लिया है। उन्होंने पूज्य बापू जी को यह भी बताया कि ये तुम्हारे पास 23 साल तक ही रहेंगे और उसके बाद मानवता व सृष्टि के उद्धार के लिए उन्हीं के पास ही चले जाएंगे जिन्होंने इन्हें इस नेक कार्य के लिए संसार पर भेजा है। उन्होंने यह भी बताया कि आप के बहुत ही ऊंचे भाग्य हैं कि परम पिता परमेश्वर ने अपने नूर को प्रकट करने के लिए आपके घर को ही चुना है।

पूजनीय गुरु जी के बचपन के अद्भुत नूरी खेलों को पूज्य बापू जी ने खास करके अपने अंदर के रूहानी अनुभवों से निहारा व महसूस किया। क्योंकि पूज्य बापू जी ही अपने लाडले को ज्यादा समय अपने हृदय से ही लगा के रखते। संत जी द्वारा बताये 23 वर्ष की आयु का जब समय आया जो कि अपने लाडले को अपने से जुदा करने का अति कष्टमई समय था। हालांकि पूज्य बापू जी इस बात से संतुष्ट थे कि सच्चे मुर्शिदे-कामिल परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के इलाही हुक्म को प्रवान चढ़ा रहे हैं

परन्तु इकलौती व लाडली संतान को अपने से जुदा करना, 23 साल की भरी जवानी की आयु, छोटे-छोटे साहिबजादे, साहिबजादियां, यह दृष्टांत भी तो पूज्य बापू जी के लिए अपने-आप में एक दर्द से कम नहीं था। पूज्य माता-पिता का लाडला, आंखों का तारा 23 सितम्बर 1990 को डेरा सच्चा सौदा की गुरगद्दी पर बतौर तीसरे पातशाह पूज्य परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने विराजमान किया।

डेरा सच्चा सौदा गुरगद्दी पर विराजमान होने के बाद पूज्य गुरु जी ने रूहानियत के साथ-साथ सृष्टि, समाज व मानवता के उद्धार के लिए अनगिनत पुण्यकार्य आरम्भ किए और उन्हें गति प्रदान करते हुए जिस ढंग से सफलता पूर्वक पूरा किया दुनिया पूज्य माता जी को और पूज्य बापू जी को याद करते हुए कोटि-कोटि नमन करती है।

डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों श्रद्धालुओं का स्रेह, प्यार व सत्कार पूज्य माता जी के प्रति तथा इस बहुत ही आदरणीय पूरे शाही परिवार के प्रति समर्पित है। आज 9 अगस्त को अति पूजनीय माता नसीब कौर जी इन्सां का 86वां जन्म दिन साध-संगत अपने सतगुरु प्यारे के प्रति अथाह श्रद्धा, विश्वास व दृढ़ता पूर्वक पूरे उत्साह से मना रही है। पूज्य माता जी को और समस्त शाही परिवार को इस शुभ अवसर पर लख-लख सजदा और पूजनीय गुरु जी को प्रणाम, चरणवंदना व सारी साध-संगत को बधाई हो जी।

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