मेहमान कहीं आपकी परेशानी का कारण तो नहीं बन रहा

मेहमान को भगवान का रूप माना जाता है और उसके स्वागत सत्कार में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। यह बात कहने और सुनने में तो अच्छी लगती है पर क्या आज अतिथि वाकई भगवान का रूप हैं? शायद नहीं। आज अतिथि की सोच बदल गई है। आज वह सिर्फ अपने सुख की सोचता है और इस ओर ध्यान ही नहीं देता कि वह अपने आगमन से किसी की परेशानी का कारण तो नहीं बन रहा। किसी के घर जाने पर अतिथि का फर्ज होता है कि वह ऐसे कार्य न करे जिससे दूसरा परेशान हो पर इस फर्ज को तो अतिथि भूल ही जाता है।

अतिथि यही समझता है कि किसी का मेहमान बनने का मतलब है-आराम करने जाना। जिस बिस्तर पर सो रहे हैं, उसे ठीक करने की क्या आवश्यकता? फोन अपना है और फ्री भी। फ्री काल करते जाइए। दूसरे की कार का प्रयोग करिए। पेट्रोल के पैसे तो अतिथि को भरने नहीं। पका-पकाया खाना मिलेगा। खाइए, घूमिए और सो जाइए। ऐसी सोच बनती जा रही है अतिथि की, पर आप ऐसे अतिथि से कैसे पेश आएं, यह आपकी सबसे बड़ी समस्या होती है।ऐसे अतिथि न केवल अपने आगमन से आपको परेशानी देते हैं बल्कि जाते-जाते भी परेशानियों का पिटारा आपके लिए छोड़ जाते हैं। ऐसे अतिथियों से निपटना कोई टेढ़ी खीर नहीं। बस आवश्यकता है थोड़ी सूझ-बूझ की, जिससे आपकी मेहमाननवाजी में भी कमी न आए और अतिथि आपके ऊपर भारी भी न पड़ें।

आइए जानें कैसे

स्पष्ट शब्दों में अतिथि को जवाब देना सीखिए। जरूरत से ज्यादा नम्रता आपको महंगी पड़ सकती है। अगर वह आपका कम्प्यूटर या अन्य कोई वस्तु प्रयोग करना चाहते हैं तो उन्हें कहिए कि अभी यह जरूरी काम कर रहे हैं। कम्प्यूटर खाली होने पर ही वह काम कर सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि वे आपके व्यक्तिगत सामान जैसे तौलिया, शेविंग किट, बेड शीट का प्रयोग करें तो आप उन्हें बोल दें कि आप ये सब किसी के साथ शेयर नहीं करते, इसलिए कृपया इस सामान का प्रयोग न करें। अगर वे देर रात को घर लौट रहे हो तो उन्हें अतिरिक्त चाबियां दे दें।

इससे आपकी नींद में खलल नहीं पड़ेगा।

  • अपने अतिथि के साथ बातें करें पर अपने दैनिक कार्यों की परवाह करें क्योंकि वे काम आपको स्वयं करने हैं। बिस्तर लगाने में, खाना लगाने में आप अतिथि से मदद मांगें। अतिथि आपको सहायता बेशक मन से न भी दें तो भी मजबूरी में देनी ही पड़ेगी। अगर आपका मेहमान बहुत ही बिगड़ा हुआ है तो उससे अपना रिश्ता सीमित दायरे में ही निभाएं। बहुत अधिक औपचारिकता भी आपको महंगी पड़ सकती है।
  • कई अतिथि ऐसे भी होते हैं, जो आपका सामान अपने बैग में भरने से भी नहीं चूकते। अपने कीमती सामान को लॉकर में ही रखिए। उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी का वहन आपको ही करना है।
  • अगर आप कामकाजी हैं तो मेहमानों से आप जल्दी परेशान हो सकती हैं। कई मेहमान ऐसे होते हैं जो आपको घर के कामकाज में मदद करना तो दूर, आप पर अपने काम का भार भी डाल देते हैं। अगर मेहमान 1-2 दिन के लिए आया है तो फर्क नहीं पड़ता पर जिस मेहमान ने 1-2 महीने टिकना हो, मुश्किल तब आती है। ऐसे में शर्म-शर्म में उसकी घर के कामकाज में सहायता लेने से न हिचकिचाएं। न ही उसे आदत डालें कि वह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। उसे थोड़ा कष्ट करने दें। इससे आपको भी कार्य में सहायता मिलेगी।
  • अगर आप अपने समय की कद्र नहीं करेंगे तो मेहमान भी इसका फायदा उठाएंगे। मेहमान को घुमाने, टिकट रिजर्वेशन कराने, उसके लिए गाड़ी का प्रबंध करने व अन्य प्रोग्राम तय करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर न लें। हां, आप उसकी सहायता कर सकें तो अवश्य करें। उसे गाइड करें पर कार्य उसे स्वयं ही करने दें।
  •  मेहमान के साथ आपका बर्ताव ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि वह अगली बार आपके घर का रुख भी न करें। उसे एक-दो बार बाहर डिनर पर ले जाएं। जब आपकी छुट्टी हो तो उसके लिए कुछ स्पेशल बनाएं, उसके साथ कुछ समय बिताएं, उसके साथ घूमने जाएं, उसकी मदद के लिए भी तैयार रहें। आखिर वह आपका मेहमान है, जिसका जिम्मा आप पर है। उसके स्वागत में कोई कमी न रहे पर थोड़ी एहतियात अवश्य बरतें ताकि अतिथि आपको भगवान का ही रूप लगे।

-सोनी मल्होत्रा

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