Improve the personality of the conversation

अच्छी बातचीत करना भी एक कला है जो सभी को नहीं आती। गाड़ियों, बसों में रोजाना आने-जाने वाली लड़कियां जोर-जोर से चिल्लाकर अपनी बातचीत में मस्त रहती हैं। उन्हें केवल अपनी बातचीत का ही मतलब रहता है। आसपास के लोग भी सुन रहे हैं, वो क्या कहेंगे, क्या सोचेंगे, इससे उनका कोई सरोकार नहीं होता।

कभी आपने सोचा या महसूस किया है कि किसी दूसरे का मन आपसे बार बार बात करने को या आपका मन किसी से बार-बार बात करने को होता है। इसका कारण यह है कि वह व्यक्ति सलीके से पेश आता है । वह धैर्यपूर्वक बातचीत करता है। सच भी है, आज वही व्यक्ति हर क्षेत्र में सफलता के शिखर को छू सकता है जो उचित रीति से बातचीत करने का अनुभव रखता है।

वार्तालाप या बोलचाल का तरीका अभिव्यक्ति का माध्यम होने के साथ ही हमारे व्यक्तित्व का पूर्ण परिचायक है। बातचीत के द्वारा ही हम स्वाभाविक रूप से किसी व्यक्ति का परिचय ही प्राप्त नहीं करते,

बल्कि उचित ढंग से अपने विचार संप्रेषित करके और दूसरों की बातें समझकर हम अपने व्यक्तित्व को भी प्रभावशाली बना सकते हैं।

  •  बस में सफर करते समय भूलकर भी अनर्गल बातें न करें।
  •  एक ही बात को बार-बार न दुहरायें, कि सुनने वालों को बोरियत पैदा हो।
  •  अभिवादन वार्तालाप के लिए प्रथम आवश्यकता है। कोई व्यक्ति चाहे बड़ा हो या छोटा या बराबर का हो, हमेशा आप संबोधन कीजिए।
  •  वार्तालाप आरंभ करने से पूर्व आपको स्थान विशेष व समय का ध्यान रखना जरूरी है। हो सके तो बिना वजह हंसें नहीं।
  •  हमेशा वार्तालाप प्रसन्न मन से कीजिए। आत्मविश्वास से भरी हुई बात करेें, न कि हीनभावना से ग्रस्त होकर।
  •  वार्तालाप में किसी की बुराई शामिल करना व्यक्ति की अयोग्यता का परिचय है जो निस्संदेह वार्तालाप में बाधक है।
  •  बातचीत करते समय नाक में उंगली देना, नाखून कुतरना, नसें चटकाना आदि क्रियाकलाप न करें।
  •  हालचाल मुस्कान के साथ ही पूछना चाहिए न कि व्यंग्य के साथ।
  •  वार्तालाप में भूलकर भी शिष्टाचार का उलंघन नहीं होना चाहिए। सफलता के लिए उच्च विचार व बातचीत की कला को दृष्टिगत रखते हुए वार्तालाप में माहिर होना चाहिए।
  •  वार्तालाप के समय सामने वाले की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए। हो सके तो फेस-रीडिंग करें।
  •  निस्संकोच होकर स्पष्ट बात करने का अभिप्राय अपमान या उद्दंडता नहीं है, बल्कि संकोची स्वभाव छोड़कर विश्वास से बातें करना, रोचकता, कुशलता, दूरदर्शिता का परिचायक है।
  •  ‘अपने मुंह मियां मिट्ठू’ न बनें बल्कि आप ऐसा कार्य करें जिसमें खुद ही सब आपकी तारीफ करें।
  •  बातचीत करते समय न किसी से गलत सलाह लें और न ही किसी को गलत सलाह दें।
  •  यदि उचित समझें तो किसी बात का जवाब दें, अन्यथा मुस्कुरा कर चुप रह जाएं।
  •  अपनी मान मर्यादा में रहकर एक सीमा के अंदर बात करें।

इसके अलावा वार्तालाप की सफलता आपके बोलने और भाषा पर निर्भर करती हैं। यदि आप कम व महत्त्वपूर्ण बोलते हैं और अपनी भाषा में साहित्यिक शब्दों के साथ उर्दू, अंग्रेजी के शब्दों को वरीयता देते हैं तो समझिये कि आप प्रतिभाशाली व बहुमुखी एवं वार्तालाप की कला में माहिर हैं।

और अगर आपके अंदर वाकपटुता (बातचीत की कला) का अभाव है तो आपको अपने वार्तालाप को प्रभावशाली बनाने के लिए अत्यधिक प्रयत्न करना होगा। -कु. मुधुर पाण्डेय

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