Different identity created by cultivating lemon grass

लेमन ग्रास की खेती कर बनाई अलग पहचान
देशभर में जहां कई किसान कृषि को घाटे का सौदा मानकर इसे छोड़ रहे हैं तो वहीं कुछ ऐसे युवा भी हैं, जो खेतीबाड़ी को ही अपना करियर बना रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं लखनऊ के रहने वाले समीर चड्ढा।

समीर न केवल खेतीबाड़ी करके कृषि के क्षेत्र में एक उम्मीद जगा रहे हैं बल्कि दूसरे युवा किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही वे खेती के तौर तरीकों की ट्रेनिंग भी देते हैं। युवा किसान समीर ने कृषि क्षेत्र के ऐसे-ऐसे तौर तरीके ढूँढ निकाले हैं जिससे न केवल खुद बल्कि आसपास के लोग भी मुनाफा कमा कर रहे हैं। आखिर यह सब कैसे संभव हुआ, आइए जानते हैं यह पूरी कहानी।

समीर चड्ढा उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं। उनका बचपन से ही खेती से खास लगाव रहा है। वे अक्सर खेती को एक बिजनेस के रूप में देखते थे, बस तलाश थी किसी मौके की। उन्होंने शिक्षा को जारी रखते हुए एमबीए ग्रेजुएशन तक शिक्षा ग्रहण की। कुछ सालों तक उन्होंने एजुकेशन सेक्टर में काम किया और साथ ही जब भी उन्हें वक्त मिलता तो वो खेती संबंधी जानकारियां जुटाते। फिर साल 2014 में उनका खेती का तरफ ज्यादा रूझान बढ़ा और इसी वर्ष उन्होंने धान, गेहूँ और कई तरह की सब्जियां उगार्इं। लेकिन बाद में एरोमेटिक फसलें उगाना शुरू कीं, जिनमें उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा सौदा लेमन ग्रास और खस का लगा।

31 वर्षीय समीर पहले पारंपरिक खेती करते थे। इसमें लागत के मुकाबले बहुत अच्छी कमाई नहीं होती थी। मार्केट में फसल की कीमत भी अच्छी नहीं मिल रही थी। फिर उन्हें ख्याल आया कि क्यों ना ऐसी खेती की जाए जिसमें लागत कम हो और मुनाफा ज्यादा हो। काफी रिसर्च करने के बाद उन्हें एरोमेटिक प्लांट के बारे में पता चला। साल 2014 में अश्वगंधा और सतावर की खेती शुरू की। इसमें अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन बढ़िया मार्केटिंग नहीं हो सकी। इसके बाद समीर को लेमन ग्रास के बारे में पता चला। अगले ही साल यानी 2015 से लेमन ग्रास की खेती शुरू की।

पहले पत्तियों व फिर आॅयल का बिजनस

लेमन ग्रास की खेती के लिए समीर ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिसिनल एरोमेटिक प्लांट, लखनऊ से तीन दिन की ट्रेनिंग ली। उसके बाद एक एकड़ जमीन पर उन्होंने फार्मिंग की शुरूआत की। कुछ महीने बाद प्लांट तैयार हो गए। इसके बाद उन्होंने उसकी पत्तियों की मार्केटिंग शुरू की। शुरूआत में लोकल लेवल पर और फिर बड़े बिजनेसमैन को वे लेमन ग्रास की पत्तियां सप्लाई करने लगे। इससे उन्हें अच्छी-खासी कमाई होने लगी। उन्होंने चड्ढा एरोमा फार्म नाम से खुद की कंपनी रजिस्टर की है। समीर कहते हैं कि लेमन ग्रास की खेती के बाद मुझे उसके आॅयल के बारे में जानकारी मिली। इसके आॅयल की अच्छी-खासी डिमांड होती है। विशेष तौर पर हेल्थ सेक्टर में।

फिर साल 2016 में समीर ने 2.5 लाख रुपए की लागत से आॅयल निकालने की एक मशीन लगाई। फिलहाल हर साल वह करीब 2,500 लीटर आॅयल की मार्केटिंग करते हैं। इसके बाद पत्तियों की मार्केटिंग के साथ ही आॅयल का भी कारोबार चलने लगा। मीडिया में समाचार प्र्रकाशित होने के बाद बड़े बिजनेसमैन भी समीर के ग्राहक बन गए। इससे उनका मनोबल बढ़ा और धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ने लगा। आज समीर चड्ढा 20 एकड़ जमीन पर लेमन ग्रास की खेती कर रहे हैं। समीर बताते हैं कि लेमन ग्रास एक बार लगाने पर इस फसल से सात से आठ साल तक तेल का अच्छा प्रोडक्शन मिलता है। यह एक ऐसी फसल हो गई जो एक बार लगाने पर मुनाफा ही देती रहेगी। इसका ज्यादा रखरखाव भी नहीं करना पड़ता।

मार्केटिंग में करेंगे दूसरे किसानों की मदद

समीर खुद खेती करने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी बहुत ही कम शुल्क में लेमन ग्रास की खेती करने की ट्रेनिंग देते हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित कई राज्यों के किसानों को अब तक वो लेमन ग्रास फार्मिंग की ट्रेनिंग दे चुके हैं। वे प्रत्येक माह 20 से 25 किसानों को ट्रेनिंग देते हैं। फिलहाल 100 किसान ऐसे हैं जो उनके खेत में लेमन ग्रास की फार्मिंग करते हैं। समीर उन्हें पौध प्रोवाइड करवाते हैं और वे उन्हें फसल तैयार होने के बाद उसकी मार्केटिंग में भी मदद करते हैं। इससे उन किसानों की भी अच्छी कमाई हो जाती है।

समीर ने लेमन ग्रास के कई फायदे भी बताए। इससे निकलने वाले तेल को कई क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है। वह बताते हैं कि इसका फ्रेंगरेंस एंड फ्लेवर इंडस्ट्री, फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री, साबुन, डिटर्जेंट एंड क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री और पेस्टीसाइड इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है। इसका एक बढ़िया इस्तेमाल हैंड सेनीटाइजर में भी हो रहा है। इसके अलावा एरोमा थेरेपी के लिए स्पा वगैरह में लेमन ग्रास का काफी फायदा है। समीर कहते हैं हमारे देश में लेमन ग्रास की वार्षिक खपत 10 हजार टन है लेकिन अभी 5-6 हजार टन का ही प्रोडक्शन हो पाता है। इसलिए हमारे देश को काफी तेल इम्पोर्ट भी करना पड़ता है। इस फसल की देश में कमी है, इसीलिए इसमें अवसर भरपूर हैं।

समीर ने इस तरह की खेती के पीछे एक लाभ यह भी बताया कि यह लाने ले जाने में आसान है। अब 75 हजार रुपये के माल को एक 50 लीटर के किसी भी कैन में भरकर ले जा सकते हैं और जहां फायदा हो उस जगह या पूरे राज्य में कहीं भी बेच सकते हैं। इसके अलावा समीर खस की भी खेती करते हैं, जिसकी डिमांड भारत की पान मसाला इंडस्ट्री, फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री और आयुर्वेदिक मेडिसिन्स में खूब है। इसके अलावा न केवल भारत के इत्तर व्यापार में बल्कि यह महंगे परफ्यूम बनाने के लिए यूरोपियन देशों में भी एक्सपोर्ट होता है।

हर मौसम में हो सकती है खेती

लेमन ग्रास बिल्कुल घास ही है। इसकी खेती किसी भी जमीन पर हो सकती है। यहां तक कि रेतिली भूमि व जंगलों में भी इसकी खेती की जा सकती है। साल भर में कभी भी मौसम में लगाया जा सकता है। इसको लैमन ग्रास की पौध से लगाया जाता है, जोकि एक एकड़ में 20 हजार पौध लगती है। एक बार यह पौध लगाने के बाद आप सात से आठ साल तक इसकी पत्तियां या तेल का प्रोडक्शन ले सकते हैं। यह एक कीटमुक्त व रोगमुक्त फसल है। इसकी खेती सिंचित व असिंचित क्षेत्रों में की जा सकती है।

लेमन ग्रास से तेल निकालने की प्रक्रिया

लेमन ग्रास से आॅयल तैयार करने के लिए एक फील्ड डिस्टीलेशन यूनिट (एफडीयू) की आवश्यकता होती है। सबसे पहले लेमन ग्रास की पत्तियों को यूनिट में अच्छी तरह से भर दिया जाता है। फिर उसे टाइट बंद करने के बाद उसे स्टीम किया जाता है। स्टीम करने के बाद एक सेपरेटर के जरिए आॅयल निकलता है। इसे ठंडा करने के बाद आॅयल इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है। समीर यूनिट को गर्म करने के लिए लेमन ग्रास की बेकार हुई पत्तियों का ही इस्तेमाल करते हैं।

कम लागत में कर सकते हैं अच्छी कमाई

यदि कोई किसान छोटे लेवल पर लेमन ग्रास की खेती करना चाहता है तो एक एकड़ जमीन से इसकी शुरूआत की जा सकती है। लेमन ग्रास की सूखी पत्ती एवं आॅयल दोनों बिकता है। एक एकड़ में साल में छह से आठ टन सूखी पत्ती निकलती हैं, जोकि 25 रुपये से लेकर 30 रुपये किलो के बीच में बिकती है। जिससे किसान एक एकड़ से खर्चा निकालकर साल में 80 हजार से एक लाख रुपये तक कमा सकता है।

यदि किसान इसका लेमन ग्रास तेल का बिजनस करना चाहे तो वे अपने मुनाफे को ओर बढ़ा सकते हैं। इसमें तेल की टंकी का सेटअप लगाना पड़ता है, जिसका खर्च दो से लेकर तीन लाख रुपये तक आता है। साल भर में एक एकड़ में 120 से 150 किलो तक तेल निकलता है, जिसकी कीमत 1200 से लेकर 1500 रुपये प्रति किलो तक होती है। इसमें पूरा खर्च निकाल कर एक एकड़ में एक लाख 25 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख तक मुनाफा होता है।

चिंतामुक्त होकर करें लेमन ग्रास की खेती

खेती का मौसम से खास संबंध है। अक्सर हम देखते हैं जब भी मौसम में परिवर्तन होने लगता है तो कृषि संबंधी चिंताएं बढ़ने लगती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों के कृषि विशेषज्ञ फसलों को लेकर अनुमान व उनके रखरखाव संबंधी दिशा-निर्देश जारी करते हैं लेकिन लेमन ग्रास की खेती बिल्कुल चिंतामुक्त होकर आप कर सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि हरा-चारा चरने वाले पशु इसे खाते नहीं हैं।

आप बिना भय के जितने मर्जी रकबे में इसकी खेती कर सकते हैं। यहां तक कि विदेशों में तो इसे बड़े स्तर पर किया जा रहा है। कई देशों में 500 से लेकर एक हजार एकड़ तक इसकी खेती हो रही है। यदि आप भी लेमन ग्रास की खेती करना चाहते हैं

तो आप समीर चड्ढा से संपर्क (95541-80717) कर उनके लखनऊ फार्म हाउस पर जाकर टेÑनिंग ले सकते हैं।

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