Criminology Course Me Career Kaise Banaye - Sachi Shiksha

दुनिया में कई लोग ऐसे होते हैं जो किसी भी रहस्य को जानना और सुलझाना चाहते हैं। अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले हाइटेक तौर-तरीके पुलिस और डिटेक्टिव एजेंसियों को भी काफी परेशान कर देते हैं। इन्हें रोकने वाले विशेषज्ञों की मांग सबसे अधिक है। ये लोग थ्रिलर स्टोरीज पढ़ने में भी गहरी रूचि रखते हैं।

इसी तरह, ये लोग अपने स्वभाववश अपने आसपास, देश और दुनिया में होने वाले अपराधों के बारे में भी काफी जानकारी जुटाते हैं और यहां तक कि कई बार ये लोग अपनी जिज्ञासा को शांत करने के उद्देश्य से किसी अनसुलझे क्राइम की तह तक जाने के लिए अपनी तरफ से ही रिसर्च करनी भी शुरू कर देते हैं। यकीनन हमारे देश में भी जरुर कुछ लोग या स्टूडेंट्स इसी प्रवृत्ति के होंगे। कुछ ऐसे ही लोगों और स्टूडेंट्स के लिए हम इस आर्टिकल में क्रिमिनोलॉजी के बारे में डिटेल्ड जानकारी पेश कर रहे हैं ताकि इस फील्ड में करियर शुरू करने के लिए ऐसे लोगों को अच्छी और सटीक जानकारी मिल सके।

किस तरह का है क्षेत्र

क्रिमिनोलॉजी अर्थात् अपराध-शास्त्र, विज्ञान की ही एक विशिष्ट शाखा है, जिसमें अपराध और उससे बचाव के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इसका कार्यक्षेत्र अपराधियों की कार्यपद्धति के आधार पर बढ़ता जाता है। कोई भी अपराधी अपराध करने के दौरान जाने-अनजाने कोई न कोई सुराग अवश्य छोड़ता है। इसमें उसकी उंगलियों के निशान, बाल, खून, थूक या अन्य कोई जैविक सामग्री, अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार या अन्य सामान जैसी तमाम चीजें आती हैं। ऐसे साक्ष्यों, अपराध के तरीके, प्रकृति और उद्देश्य की गहन पड़ताल के जरिये अपराधी तक पहुंचा जा सकता है।

किसी क्रिमिनोलॉजिस्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में किसी क्राइम या अपराध के पीछे के कारण का पता करने के लिए डाटा और उपलब्ध सबूतों को कलेक्ट, एनालाइज और डिकोड करना शामिल है। इन घटनाओं को सुलझाकर अपराधियों का तिलिस्म उजागर करने वाले पेशेवरों को क्रिमिनोलॉजिस्ट (अपराध विज्ञानी) के नाम से जाना जाता है। इन क्रिमिनोलॉजिस्ट ने अनेक अपराधों से जुड़ी बेहद जटिल गुत्थियां सुलझाकर अपराधियों को न्याय के कठघरे तक पहुंचाने में मदद की है। इस रोमांचक करियर से तभी जुड़ा जा सकता है, जब क्रिमिनोलॉजी का औपचारिक अध्ययन पूरा किया जाए।

भिन्न हैं क्रिमिनोलॉजी व फॉरेंसिक साइंस

अकसर लोग फॉरेंसिक साइंस और क्रिमिनोलॉजी को एक ही समझ बैठते हैं, जबकि ये दोनों अलग-अलग हैं। फॉरेंसिक साइंस क्रिमिनोलॉजी का एक हिस्सा है, जो यह बताता है कि क्रिमिनोलॉजिस्ट किस प्रकार से अपने साक्ष्यों का अध्ययन और प्रयोग कर सकते हैं। डीएनए जांच, फिंगर प्रिंट संबंधी कार्य फॉरेंसिक साइंस में आते हैं, जबकि क्रिमिनोलॉजी में घटना-स्थल से सबूत जुटाने, अपराध से संबंधित परिस्थितियों का अध्ययन करने, अपराध करने के कारण तथा समाज पर उसके असर की परख करने और जांच दल की मदद करने जैसे काम शामिल हैं।

भारत में क्रिमिनोलॉजी से संबंधित कोर्सेज

भारत में क्रिमिनोलॉजी एक विशेष स्टडी फील्ड है। इसके अलावा, खासकर शहरी क्षेत्रों में, लगातार बढ़ते हुए अपराधों के कारण क्वालिफाइड क्रिमिनोलॉजिस्ट्स की मांग भी लगातार बढ़ रही है। इस लगातार बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए, कुछ इंस्टीट्यूट्स ने क्रिमिनोलॉजी में अकादमिक प्रोग्राम्स आॅफर करने शुरू कर दिए हैं।

इन अकादमिक कोर्सेज के तहत, कोई भी व्यक्ति इस फील्ड में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, बैचलर डिग्री और मास्टर डिग्री प्रोग्राम्स कर सकता है। कुछ स्पेशलाइज्ड इंस्टीट्यूट्स डॉक्टोरल लेवल पर भी क्रिमिनोलॉजी कोर्सेज आॅफर कर रहे हैं। यहां पेश है क्रिमिनोलॉजी में विभिन्न कोर्सेज की एक लिस्ट। आप अपनी पसंद के मुताबिक इनमें से कोई भी कोर्स कर सकते हैं।

1. क्रिमिनोलॉजी: सर्टिफिकेट कोर्स

क्रिमिनोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्सेज 6 महीने की अवधि के होते हैं और साइंस विषय सहित 12वीं पास स्टूडेंट्स ये कोर्सेज करने के लिए एलिजिबल हैं।

क्रिमिनोलॉजी में सबसे लोकप्रिय सर्टिफिकेट कोर्स निम्नलिखित है:

सर्टिफिकेट – (फोरेंसिक साइंस)
क्रिमिनोलॉजी – डिप्लोमा कोर्सेज

क्रिमिनोलॉजी में डिप्लोमा कोर्सेज की अवधि एक वर्ष होती है और साइंस विषय सहित 12वीं पास स्टूडेंट्स ये कोर्सेज करने के लिए एलिजिबल हैं।

क्रिमिनोलॉजी में सबसे लोकप्रिय डिप्लोमा कोर्सेज निम्नलिखित हैं:

डिप्लोमा – (साइबर क्राइम)
डिप्लोमा – (फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी)
डिप्लोमा – क्रिमिनल लॉ
डिप्लोमा – क्रिमिनोलॉजी एंड पेनोलॉजी

2. क्रिमिनोलॉजी: बैचलर कोर्स

क्रिमिनोलॉजी में बैचलर डिग्री कोर्स की अवधि तीन वर्ष होती है और साइंस/आर्ट्स विषय सहित 12वीं पास स्टूडेंट्स ये कोर्सेज करने के लिए एलिजिबल हैं।

क्रिमिनोलॉजी में सबसे लोकप्रिय बैचलर कोर्स निम्नलिखित है:

बीए (फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी)
क्रिमिनोलॉजी – मास्टर कोर्सेज

क्रिमिनोलॉजी में मास्टर डिग्री कोर्स की अवधि दो वर्ष होती है और साइंस/ आर्ट्स विषय सहित ग्रेजुएशन डिग्री होल्डर स्टूडेंट्स ये कोर्सेज करने के लिए एलिजिबल हैं।

क्रिमिनोलॉजी में सबसे लोकप्रिय मास्टर कोर्सेज निम्नलिखित है:

एमए – एंटी टेरोरिज्म लॉ
एमए – क्रिमिनोलॉजी एंड क्रिमिनल जस्टिस
क्राइम्स एंड पोर्ट्स – मास्टर आॅफ लेजिस्लेटिव लॉ (एलएलएम)
क्रिमिनल लॉ – मास्टर आॅफ लेजिस्लेटिव लॉ (एलएलएम)
क्रिमिनल लॉ एंड क्रिमिनोलॉजी – मास्टर आॅफ लेजिस्लेटिव लॉ (एलएलएम)
क्रिमिनोलॉजी – एमएससी
फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी रिसर्च – एमए
फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी – एमए
फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी – पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा

सिलेबस में क्या-क्या शामिल

क्रिमिनोलॉजी के तहत पुलिस प्रशासन, मानवीय चाल-चलन आदि की विस्तृत जानकारी छात्रों को दी जाती है। अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए साक्ष्यों एवं सबूतों के विश्लेषण की बारीकियां बताई जाती हैं। इसमें प्रमुख रूप से क्रिमिनोलॉजी के सिद्धांत, क्रिमिनल लॉ, पुलिस-प्रशासन, समाजशास्त्र, इतिहास, अपराध का मनोविज्ञान आदि शामिल किए जाते हैं।

उल्लेखनीय यह है कि इसमें लगातार हो रहे प्रयोगों को शामिल किया जाता है। अपराधियों के तेजी से बढ़ते नेटवर्क एवं साइबर अपराध को देखते हुए इसे भी पाठ्यक्रम का अंग बनाया गया है, ताकि बदलते समय के साथ क्रिमिनोलॉजी भी अपडेट रहे।

कौशल, जो बनाएंगे सफल

योग्यता के साथ-साथ कई ऐसे कौशल भी हैं, जो पेशेवरों के लिए जरूरी समझे जाते हैं। आमतौर पर खोजी मानसिकता, धैर्यवान, परिश्रमी तथा साहसिक गुण रखने वाले युवा इसमें काफी तरक्की करते हैं। क्रिमिनोलॉजिस्ट को आंख-कान खुले रखने होते हैं।

सामाजिक परिवेश एवं आंकड़ों का खेल होने के कारण इसमें मनोविज्ञान की समझ नितांत आवश्यक है। इसके लिए विश्लेषण का उच्च कौशल तथा साइकेट्रिस्ट का गुण भी विशेष मायने रखता है। इसके अलावा हर वक्त चुनौतियों से जूझने का जज्बा होना चाहिए। आंकड़े एकत्र करने और उन्हें तरतीब से रखने का कौशल भी इस पेशे में काफी मदद पहुंचाता है।

रोजगार की व्यापक संभावनाएं

इसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों क्षेत्रों में अवसर मिल रहे हैं। सबसे अधिक काम रिसर्च प्रोजेक्ट के रूप में मिल रहा है। इसके अलावा सीबीआई, आईबी, निजी चैनल, सरकारी अपराध प्रयोगशालाओं, पुलिस प्रशासन, न्यायिक एजेंसियों, भारतीय सेना, प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनियों, रिसर्च एनालिसिस विंग आदि में रोजगार उपलब्ध हो सकते हैं। किसी विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालय में अध्यापन का काम भी कर सकते हैं।

इसके अलावा बैचलर डिग्री प्राप्त करने के बाद, आप किसी फॉरेंसिक सर्जन, लॉ रिफार्म रिसर्चर, क्राइम सीन एनालिस्ट, ड्रग पॉलिसी एडवाइजर आदि के तौर पर काम कर सकते हैं। अपनी पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के बाद, आप क्रिमिनोलॉजी में कोर्सेज आॅफर करने वाले किसी कॉलेज में एक प्रोफेसर के तौर पर भी काम कर सकते हैं।

वेतन

गंभीरतापूर्वक कोर्स करने के बाद एक क्रिमिनोलॉजिस्ट को शुरूआती दौर में 30 से 35 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं। तीन-चार साल के अनुभव के बाद वे 50 से 55 हजार रुपये हर महीने कमा सकते हैं। इसके अलावा एक फ्रीलांसर के रूप में काम कर सकते हैं।

कोर्स से संबंधित प्रमुख संस्थान

नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस, नई दिल्ली लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ पटना विश्वविद्यालय, बिहार यूनिवर्सिटी आॅफ मद्रास, चेन्नई डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश

इन पदों पर भी मिल सकता है काम

  • क्राइम इंटेलिजेंस
  • लॉ रिफॉर्म रिसर्चर
  • फॉरेंसिक एक्सपर्ट
  • कंज्यूमर एडवोकेट
  • ड्रग पॉलिसी एडवाइजर
  • एन्वायर्नमेंट प्रोटेक्शन एनालिस्ट

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