Cancer prevention and prevention

कैंसर एक ऐसा गंभीर रोग है जिसमें शरीर के किसी भाग की कोषिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने लगती है। मानव शरीर में कैंसर की रोकथाम शरीर के किसी भी ऊतक में कई गुणा और प्रभावित कोषिकाओं के बिना रोक के विकास के साथ रोगों का एक जटील है।

योग्य विचारित संकेत (निषान) और लक्षणों की गांठ, विषेष रक्त स्त्राव लंबे समय तक खांसी, साफ न होने वाला वजन और कई हलचल कोषिकाओं का बढ़ना शामिल है। (लगभग 100 प्रकार के कैंसर के साथ)। इसमें शरीर के अलग-2 हिस्सों पर हमला करने और फैलने की शक्ति के साथ विभिन्न कोषिकाओं का बढ़ना शामिल है। इसमें मृत्यू के बिना या बिना प्रोगाम के वेहद कोषिका विभाजन भी शामिल है। रक्त घृणा नियाण, ऊतकों के हमले और मैटास्टेसिस के मिलने को बढ़ावा देना ।
लैटिन शब्दों में कैसंर का अर्थ है ‘‘क्रैब‘‘, तथा फ्रासीसीं भाषा में ‘‘कांकेर‘‘ के रूप में दर्षाया गया है। कैंसर को टयूमर तथा असामान्य बुद्धि के रूप में भी जाना जाता है।

कैंसर के विभिन्न प्रकार-

  1. कार्सिनोमा (कैंसर पैदा करने वाला तत्व) – उपकला कोषिकाओं को प्रभावित करना स्तन, फेफडे़, अग्नयाषय, कोलन, प्रोस्टेट।
  2. सारकोमा -मिलाना, उतम जोड़ना, जालीवाद रचना (हडडियां, कोमल ऊतक, जोड़, मांसपेषियां, खून की वहिकायें, सफेद खून की रेषियां ग्रंथियां, जननाषक प्रणाली तथा रेषेदार ऊतक) से बढ़ावा होता है। हालांकि सक्त की चेशढायें दुख देने लगती हैं।
  3. ल्यूकोमियां – रक्त की गंभीर रोग जिससे मृत्यु हो अंगो को ढकने वाली उतक ये विकसित होता है। श्वेत रक्त की संख्या में बड़हाई होती है जो अन्य अंगो की कोषिकाओं को नष्ट कर देती है।
  4. लिम्फोमा-ष्वेत कोषिका द्रव फैलाने में शुरू (टी-कोषिकाएं, बी-कोषिकांए, हाजकिल रीड कोषिकाएं, नान हाडगेट लिम्फोमा।
  5. नसों पर जड़ा अवारण – टयूमर बनाने के लिए हडियों का बढ़ना।
  6. मेलेनोमा त्वचा कैंसर पर छपा हुडम फार्म आँखों में हो सकता है।
  7. मस्तिक्षक और रीढ़ की हड्डी के गांठ रसौली।
  8. अन्य कई प्रकार के टयूमर-(जर्म कोषिकायें, कार्सपबोल्ड ट्यूमर इत्यादि कैसंर कोषिकायें जारी रहती हैं।) रोकने के बिना बाँट करने के लिए-ये उन ईषारों को अनदेखा करने के लिए सक्षम हैं जो प्रोगाम-सी के रूप में कारवाई शुरू करते हैं। गैर-आवष्यक कोषिकाओं से छुटकारा पाने के लिए मृत्यू होती है। यह हमेषा घातक होती है। यह लगभग कई ऊतको और अंगों को प्रभावित करने के लिए संचार दीक्षा द्वारा किये गये ट्यूमर कोषिकाओं को बढ़त होती है।

कैंसर के लक्षण-

  1. ट्यूमर या उसके अल्संर का पिंड पर लगाने वाले बल त्वरण (अनुपाम)
  2. परिणाम स्वरूप खंासी, निमोनिया घुटनों का निगलने में दर्द।
  3. खून की खाँसी का बहना ।
  4. आंत वा आत्र की रूकावट।
  5. एनिमिया या मलाष्य में खून बहना, पेषाब में खून योनी में खून आना।
  6. छाती या पेट के अन्दर तरल पदार्थ का बढ़ना।
  7. फेफड़ो का कैसर।
  8. लिम्फ नोडस, प्लीहा का बढ़ना आदि।
  9. प्रभावित हडिडयों के टूटने के कारण दर्द

कैंसर के प्रमुख कारण-

कैंसर कई तरह के विभिन्न कारणों से हो सकता है जो अकेले या मिलजुल डंगो के काम करते है लेकिन शासन अज्ञात रहता है। यह अच्छी तरह से स्थापित रहता है कि कुछ रसायनों की हानि बढ़ी हुई है। 90 से 95 प्रतिषत मामले वातावरण या जीवन शैली कारकों से वंष परमपरा से प्राप्त काफी बदलाव के कारण हो सकते है।

जबकि 5 प्रतिषत से 10 प्रतिषत वंष परंमपरागत तालिका के कारण वंष होते हैं। अधिकतर कैंसर से हेाने वाली मौतों में तंबाकू 25 से 30 प्रतिषत खाना और मोटापा या अधिक मोटापेपन (30-35 प्रतिषत) की अवस्था, रोग फैलना (15 से 20 प्रतिषत) फैलना और बढ़ी किरणो द्वारा (10 प्रतिषत) तक दोनो शामिल हैं।

अधिक तनाव, शारीरिक गतिविधि की जाँच और प्रदूषण भी हानिकारक है। तंबाकू के धुएं के शरीर में फैलने के रूप में रसायन 90 प्रतिषत फेफड़ो के कैंसर, शोर यंत्र, सिर, गर्दन, पेट, पेट प्रणाली, पेट की जठराग्नी का स्थान, मूत्राषय तथा किडनी का कारण बनता है। हांलाकि अधिक भोजन और दोषपूर्ण व्यायाम के रूप में आहार की अधिकतम से शरीर के वजन की बढ़ाई का कारण कैंसर से मृत्यु हो सकती है। इससे पेट तथा बड़ी आँत मुख्य और लबां भाग (कालन) का कैंसर भी हो सकता है।

लगभग 18 प्रतिषत कैंसर से होने वाली मौतें वायर के बढ़ने के कारण हो सकती है, एपस्टीन-बार वायरस के मिलन में आने के बाद बर्किट की छोटी सफेद रक्त कोषिका बढ़ जाती है जननांग आने से सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा होता है। इनकी पहचान ल्यूकेमिया वायरस के रूप में की गई है।

व्यक्त कोषिकाएं घातक हो सकती है। हालांकि, जीवाणु संक्रमण से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। कभी-2 अल्ट्रा टायलेट फैसलां 10 प्रतिषत कैंसर से विपरीत बढ़ सकते है। कैंसर का साथ रखने का कारण 1 प्रतिषत पर आक्रमण करने वाली टयूमर कोषिकाओं की सीमांओ के आने से हैं।

‘‘ कबीर पाँचों भारिए, जा मारे सुख होय
भलाभली सब कोई कहै, बुरा न कहसी कोय।‘‘

कैंसर आगे बढ़ने का निदान –

इनमें खून की जाँच, एक्स रे (मषीन से किसी अंग का अन्दर फोटो लेना), व्यक्ति के अन्दर से तुलना करना शरीर का परीक्षण करना शामिल हो। रोग के कारण के लिए शरीर उतक के निकालने की क्रिया कोषिकाओं की तेजी से बढ़ना असामन्ता दिखाता है। कोषिका द्रव्य तथा साथ के रसायन अन्य प्रकार के ऊपर वाले परिक्षण हैं।

सबसे बड़े अंष में बदलाव, जैसे कि कोषिकाओं का अध्ययन, उनकी बढ़ाई का गुणसूत्र या खटने की रसौली क्षमता की लगातार मौत का कारण बनाती है। कैंसर कोषिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली, अंगों और एक नेटवर्क से बाहर निकलती है। सबसे छोटे अंष में बदलाव तथा बड़े बदलाव, घातकता एक टयूमर की क्षमता को आखिर में मौत का कारण बनाती है।

कैंसर कोषिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली, अंगो, जाली दार रचना और विरोध रूप से जीनके कारण विषेष कोषिकाओं के एक नसों को जाल से बाहर निकलती है। वंष परमपरा में बदलाव तीन प्रकार के डी.एन.ए में मरम्मत के रूप व्यवहार को जीन लाते हैं। इनसब बदलाव की अवस्था से लेकर अलग प्रकार के कैंसर तक हैं।

कैंसर से बचाव-

यह बिमारी और लंबे जीवन से सुरक्षा का एक प्रमुख पहलू है।

‘‘ लूटि सके तो लूट ले, राम नाम की लूट
फिर पाछे पछाताहुगे, प्राण जाहिंगे छूट‘‘

  • तंबाकू के सेवन से बचें क्योंकि धूम्रपान से फेफड़े, मूँख, गले, स्वरयंत्र, अग्न्याषय, मूत्राषय, गुर्द आदि में अलग-2 प्रकार के कैंसर होते हैं, तम्बाकू चबाने से मूँह के अन्दर बड़ा कैंसर होता है।
  • फलों, सब्जियों, सबूत अनाज और दूध पीने के स्वस्थ आहार लेने की कोषिष करें। परिष्कृत स्त्रोंतो और पशु स्त्रोतांे के वसा सहित उच्च कैलोरी भोजन लेने से मोटापे से बचें। शराब के उपयोग से स्तन, फेफड़े, गल्ले और गुर्दे का कैंसर हो सकता है। लबें समय तक माँस सीमित रखें। आप अतरिक्त अंगों के लिए तेल और मिले हुए नटस से लगते भोजन ले सकते है।
  • स्वस्थ वनज बनाए रखें और शरीरिक रूप से क्रिय से लगा का रखें। शरीर का व्यायाम बढ़ाए रखें। फैले हुए सूर्य से खुद को बचांए। खुले ग्राम क्षेत्र को अपना कर रखें। लेकिन छाया में रखने की कोषिष करें। उदराता से सूर्य की कंजूसी न करें।

तेज धूप से बच कर रहें।

‘‘दूख में सुमिरन सब करें, सुख में करै न कोय
जे सुख में सुमिरन करें, तो दुख काहे होय‘‘

  • जरूरत पड़ने पर टीका लगवायें। उदाहरण के लिए हैपेटाइटिस-बी के टीके से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है बल्कि इन्सानियत पैपिलोभ यौन रूप से वायरस है जो बच्चेदानी या अन्य जन नांरा कैंसर को जन्म दे सकता है। एच.पी.वी. किटाणू की सिफारीष लगभग 11 और 12 साल के बच्चे के लिए की जाती है।
  • जोखिम भरेलिंग व्यवहार से बचें। एच.आई.वी. या एच.पी.वी. के साथ लिंग करने से मलद्वार, योनी, लिंग, गल्ले फेफड़े और जिगर (तिल्ली) के कैंसर का खतरा अधिक होता है। सुइयों को सांता न करें क्योंकि अतः षिरा दवाईयों स एच.आई.पी तथा शरीर के प्रमुख अंग यकृत की गभींर बिमारी (जिगर में सूजन) का कैंसर बढ़ सकता है।
  • नियमित रूप से चिकित्या देखभाल जैसे कि त्वचा, गर्भाषय, पेट आदि के माध्यम से आपके लिए डाक्टर की अच्छी दवाईयों के लिए अनुरोध कर समय अनुसार लें।
  • सूरज की रोषनी से अत्यधिक विकिरण चिकित्सा प्राप्त करें। घुटने के दर्द से बचने के लिए (दंडित होने से सुरक्षित बचाव) दवाएं लें, भगोड़े के लिए विटामिन स्टूल कालर चार्ट लें।
  • स्तन, ग्रासनली, गुर्दे और अग्नाष्य के कैंसर को रोकने के लिए मोटापे से बचें।
  • प्रयावरण जोखिम संक्षा की सीमा निष्चित करें।

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