Build Confidence in Children - Sachi Shiksha

जब स्कूल में कोई बच्चा होशियार होने के बावजूद अपने अन्य कमजोर साथियों से पीछे रह जाता है तो उसमें आत्म-विश्वास की कमी होने लगती है। ऐसे में बच्चे के माता-पिता उसको डांटते हैं और उसकी तुलना अन्य बच्चों से करते हैं। बच्चे की बुनियादी आवश्यकताओं को न समझ पाने के कारण, माता-पिता बच्चे से उपेक्षापूर्ण व्यवहार करते हैं जिसका बच्चे के मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है।

बच्चे के अन्दर आत्म-विश्वास की कमी के कारण हीन भावना का जन्म होता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे का मन कोरे कागज की तरह होता है। इस उम्र में माता-पिता बच्चे को जैसा चाहें, वैसा ढाल सकते हैं। बचपन में अनुकरण की प्रवृत्ति के कारण बच्चा परिवार के अलग-अलग तौर-तरीके सीखता है।

बच्चा अधिकतर माता-पिता से ही सीखता है। अगर माता-पिता बिना सोचे-समझे बच्चे की हर आवश्यकता को पूरी करते चले जायेंगे तो बच्चा जिद्दी हो जाता है।

माता-पिता द्वारा बच्चे को बात-बात पर टोकने व बच्चे की भावनात्मक आवश्यकता को न समझ पाने के कारण, बच्चे में हीन भावना का जन्म होता है। बच्चों में आत्म-विश्वास कैसे उत्पन्न हो? इसके लिए माता-पिता को बच्चों पर विश्वास करके उनको घर की छोटी-मोटी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।

बच्चों की रूचि का ख्याल रखें और उन्हें उनकी रूचि का कार्य करने दें। अपना कुछ समय बच्चों के साथ व्यतीत करें। बच्चों को बात-बात पर फटकारने की अपेक्षा उन्हें प्यार से समझायें। अच्छा कार्य करने पर बच्चों की प्रशंसा करें और पुरुस्कार दें। आत्म-विश्वास से युक्त बच्चे ही आगे चलकर सफलता प्राप्त करते हैं और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हैं।

-विक्रम भंडारी

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